श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.7.49

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

भगवान् स्वेन भागेन सर्वात्मा सर्वभागभुक्।

दक्षं बभाष आभाष्य प्रीयमाण इवानघ॥ ४९

bhagavān svena bhāgena sarvātmā sarvabhāgabhuk|

dakṣaṃ babhāṣa ābhāṣya prīyamāṇa ivānagha|| 49

अर्थ

सर्वान्तर्यामी श्रीहरि यों तो सभीके भागोंके भोक्ता हैं; तथापि त्रिकपाल-पुरोडाशरूप अपने भागसे और भी प्रसन्‍न होकर उन्होंने दक्षको सम्बोधन करके कहा॥ ४९॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें