sarvabhūtātmanāṃ brahman sa śāntimadhigacchati|| 54
अर्थ
ब्रह्मन्! हम—ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर—तीनों स्वरूपतः एक ही हैं और हम ही सम्पूर्ण जीवरूप हैं; अतः जो हममें कुछ भी भेद नहीं देखता, वही शान्ति प्राप्त करता है॥ ५४॥
त्रयाणामेकभावानां यो न पश्यति वै भिदाम्।
सर्वभूतात्मनां ब्रह्मन् स शान्तिमधिगच्छति॥ ५४
ब्रह्मन्! हम—ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर—तीनों स्वरूपतः एक ही हैं और हम ही सम्पूर्ण जीवरूप हैं; अतः जो हममें कुछ भी भेद नहीं देखता, वही शान्ति प्राप्त करता है॥ ५४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.7.54 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 441) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/7/54/