॥ श्रीहरिः ॥
एत३द्भगवतः शम्भोः कर्म दक्षाध्वरद्रुहः।
श्रुतं भागवताच्छिष्यादुद्धवान्मे बृहस्पतेः॥ ६०
etadbhagavataḥ śambhoḥ karma dakṣādhvaradruhaḥ|
śrutaṃ bhāgavatācchiṣyāduddhavānme bṛhaspateḥ|| 60
अर्थ
विदुरजी! दक्ष-यज्ञका विध्वंस करनेवाले भगवान् शिवका यह चरित्र मैंने बृहस्पतिजीके शिष्य परम भागवत उद्धवजीके मुखसे सुना था॥ ६०॥
एतद्भगवतः शम्भोः कर्म दक्षाध्वरद्रुहः।
श्रुतं भागवताच्छिष्यादुद्धवान्मे बृहस्पतेः॥ ६०
विदुरजी! दक्ष-यज्ञका विध्वंस करनेवाले भगवान् शिवका यह चरित्र मैंने बृहस्पतिजीके शिष्य परम भागवत उद्धवजीके मुखसे सुना था॥ ६०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.7.60 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 442) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/7/60/टिप्पणियाँ
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प्रा० पा०—एवं भग०।
(मुद्रित पृष्ठ 442)