श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.8.10

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तथा चिकीर्षमाणं तं सपत्न्यास्तनयं ध्रुवम्।

सुरुचिः शृण्वतो राज्ञः सेर्ष्यमाहातिगर्विता॥ १०

tathā cikīrṣamāṇaṃ taṃ sapatnyāstanayaṃ dhruvam|

suruciḥ śṛṇvato rājñaḥ serṣyamāhātigarvitā|| 10

अर्थ

उस समय घमण्डसे भरी हुई सुरुचिने अपनी सौतके पुत्र ध्रुवको महाराजकी गोदमें आनेका यत्न करते देख उनके सामने ही उससे डाहभरे शब्दोंमें कहा॥ १०॥

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