श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.8.9

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

एकदा सुरुचेः पुत्रमङ्कमारोप्य लालयन्।

उत्तमं नारुरुक्षन्तं ध्रुवं राजाभ्यनन्दत॥ ९

ekadā suruceḥ putramaṅkamāropya lālayan|

uttamaṃ nārurukṣantaṃ dhruvaṃ rājābhyanandata|| 9

अर्थ

एक दिन राजा उत्तानपाद सुरुचिके पुत्र उत्तमको गोदमें बिठाकर प्यार कर रहे थे। उसी समय ध्रुवने भी गोदमें बैठना चाहा, परन्तु राजाने उसका स्वागत नहीं किया॥ ९॥

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