श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.8.13

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तपसाऽऽराध्य पुरुषं तस्यैवानुग्रहेण मे।

गर्भे त्वं साधयात्मानं यदीच्छसि नृपासनम्॥ १३

tapasā''rādhya puruṣaṃ tasyaivānugraheṇa me|

garbhe tvaṃ sādhayātmānaṃ yadīcchasi nṛpāsanam|| 13

अर्थ

यदि तुझे राजसिंहासनकी इच्छा है तो तपस्या करके परम पुरुष श्रीनारायणकी आराधना कर और उनकी कृपासे मेरे गर्भमें आकर जन्म ले’॥ १३॥

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