॥ श्रीहरिः ॥
नूनं भवान् भगवतो योऽङ्गजः परमेष्ठिनः।
वितुदन्नटते वीणां हितार्थं जगतोऽर्कवत्॥ ३८
nūnaṃ bhavān bhagavato yo'ṅgajaḥ parameṣṭhinaḥ|
vitudannaṭate vīṇāṃ hitārthaṃ jagato'rkavat|| 38
अर्थ
आप भगवान् ब्रह्माजीके पुत्र हैं और संसारके कल्याणके लिये ही वीणा बजाते सूर्यकी भाँति त्रिलोकीमें विचरा करते हैं॥ ३८॥
नूनं भवान् भगवतो योऽङ्गजः परमेष्ठिनः।
वितुदन्नटते वीणां हितार्थं जगतोऽर्कवत्॥ ३८
आप भगवान् ब्रह्माजीके पुत्र हैं और संसारके कल्याणके लिये ही वीणा बजाते सूर्यकी भाँति त्रिलोकीमें विचरा करते हैं॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.8.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 447) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/8/38/