उनके अंग-प्रत्यंग किरीट, कुण्डल, केयूर और कंकणादि आभूषणोंसे विभूषित हैं; गला कौस्तुभमणिकी भी शोभा बढ़ा रहा है तथा शरीरमें रेशमी पीताम्बर है॥ ४८॥✎ 369
किरीटिनं कुण्डलिनं केयूरवलयान्वितम्।
कौस्तुभाभरणग्रीवं पीतकौशेयवाससम्॥ ४८
उनके अंग-प्रत्यंग किरीट, कुण्डल, केयूर और कंकणादि आभूषणोंसे विभूषित हैं; गला कौस्तुभमणिकी भी शोभा बढ़ा रहा है तथा शरीरमें रेशमी पीताम्बर है॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.8.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 448) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/8/48/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)