उनके कटिप्रदेशमें कांचनकी करधनी और चरणोंमें सुवर्णमय नूपुर (पैजनी) सुशोभित हैं। भगवान्का स्वरूप बड़ा ही दर्शनीय, शान्त तथा मन और नयनोंको आनन्दित करनेवाला है॥ ४९॥✎ 369
कांचीकलापपर्यस्तं लसत्कांचननूपुरम्।
दर्शनीयतमं शान्तं मनोनयनवर्धनम्॥ ४९
उनके कटिप्रदेशमें कांचनकी करधनी और चरणोंमें सुवर्णमय नूपुर (पैजनी) सुशोभित हैं। भगवान्का स्वरूप बड़ा ही दर्शनीय, शान्त तथा मन और नयनोंको आनन्दित करनेवाला है॥ ४९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.8.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 448) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/8/49/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)