छोटी माता सुरुचिने अपने चरणोंपर झुके हुए बालक ध्रुवको उठाकर हृदयसे लगा लिया और अश्रुगद्गद वाणीसे ‘चिरंजीवी रहो’ ऐसा आशीर्वाद दिया॥ ४६॥✎ 1962
सुरुचिस्तं समुत्थाप्य पादावनतमर्भकम्।
परिष्वज्याह जीवेति बाष्पगद्गदया गिरा॥ ४६
छोटी माता सुरुचिने अपने चरणोंपर झुके हुए बालक ध्रुवको उठाकर हृदयसे लगा लिया और अश्रुगद्गद वाणीसे ‘चिरंजीवी रहो’ ऐसा आशीर्वाद दिया॥ ४६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.9.46 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 458) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/9/46/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1962 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): आसुओंकी → आँसुओंकी