॥ श्रीहरिः ॥
पयःस्तनाभ्यां सुस्राव नेत्रजैः सलिलैः शिवैः।
तदाभिषिच्यमानाभ्यां वीर वीरसुवो मुहुः॥ ५०
payaḥstanābhyāṃ susrāva netrajaiḥ salilaiḥ śivaiḥ|
tadābhiṣicyamānābhyāṃ vīra vīrasuvo muhuḥ|| 50
अर्थ
वीरवर विदुरजी! वीरमाता सुनीतिके स्तन उसके नेत्रोंसे झरते हुए मंगलमय आनन्दाश्रुओंसे भीग गये और उनसे बार-बार दूध बहने लगा॥ ५०॥
पयःस्तनाभ्यां सुस्राव नेत्रजैः सलिलैः शिवैः।
तदाभिषिच्यमानाभ्यां वीर वीरसुवो मुहुः॥ ५०
वीरवर विदुरजी! वीरमाता सुनीतिके स्तन उसके नेत्रोंसे झरते हुए मंगलमय आनन्दाश्रुओंसे भीग गये और उनसे बार-बार दूध बहने लगा॥ ५०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.9.50 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 459) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/9/50/