tatra tadā rājan hariṇī pipāsayā jalāśayābhyāśamekaivopajagāma || 2||
अर्थ
राजन्! इसी समय एक हरिनी प्याससे व्याकुल हो जल पीनेके लिये अकेली ही उस नदीके तीरपर आयी॥ २॥
तत्र तदा राजन् हरिणी पिपासया जलाशयाभ्याशमेकैवोपजगाम ॥ २॥
राजन्! इसी समय एक हरिनी प्याससे व्याकुल हो जल पीनेके लिये अकेली ही उस नदीके तीरपर आयी॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.8.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 606) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/5/8/2/