इनके द्वारा अधर्मका पता चल जाता है और तब दण्डके पात्रका निर्णय होता है। पापकर्म करनेवाले सभी मनुष्य अपने-अपने कर्मोंके अनुसार दण्डनीय होते हैं॥ ४३॥✎ 1949
एतैरधर्मो विज्ञातः स्थानं दण्डस्य युज्यते।
सर्वे कर्मानुरोधेन दण्डमर्हन्ति कारिणः॥ ४३
इनके द्वारा अधर्मका पता चल जाता है और तब दण्डके पात्रका निर्णय होता है। पापकर्म करनेवाले सभी मनुष्य अपने-अपने कर्मोंके अनुसार दण्डनीय होते हैं॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.1.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 700) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/1/43/
टिप्पणियाँ
२
प्रा० पा०—र्मोऽभिज्ञातः।
(मुद्रित पृष्ठ 700)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1949 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): मुनष्य → मनुष्य