श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.5.38

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

एवं त्वं निरनुक्रोशो बालानां मतिभिद्धरेः।

पार्षदमध्ये चरसि यशोहा निरपत्रपः॥ ३८

evaṃ tvaṃ niranukrośo bālānāṃ matibhiddhareḥ|

pārṣadamadhye carasi yaśohā nirapatrapaḥ|| 38

अर्थ

सचमुच तुम्हारे हृदयमें दयाका नाम भी नहीं है। तुम इस प्रकार बच्चोंकी बुद्धि बिगाड़ते फिरते हो। तुमने भगवान्‌के पार्षदोंमें रहकर उनकी कीर्तिमें कलंक ही लगाया। सचमुच तुम बड़े निर्लज्ज हो॥ ३८॥

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