ṛte tvāṃ sauhṛdaghnaṃ vai vairaṅkaramavairiṇām|| 39
अर्थ
मैं जानता हूँ कि भगवान्के पार्षद सदा-सर्वदा दुःखी प्राणियोंपर दया करनेके लिये व्यग्र रहते हैं। परन्तु तुम प्रेमभावका विनाश करनेवाले हो। तुम उन लोगोंसे भी वैर करते हो, जो किसीसे वैर नहीं करते॥ ३९॥
ननु भागवता नित्यं भूतानुग्रहकातराः।
ऋते त्वां सौहृदघ्नं वै वैरङ्करमवैरिणाम्॥ ३९
मैं जानता हूँ कि भगवान्के पार्षद सदा-सर्वदा दुःखी प्राणियोंपर दया करनेके लिये व्यग्र रहते हैं। परन्तु तुम प्रेमभावका विनाश करनेवाले हो। तुम उन लोगोंसे भी वैर करते हो, जो किसीसे वैर नहीं करते॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.5.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 729) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/5/39/