॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.14.26
संस्कारकालो जायाया अपत्यस्यात्मनस्तथा।
प्रेतसंस्था मृताहश्च कर्मण्यभ्युदये नृप॥ २६
saṃskārakālo jāyāyā apatyasyātmanastathā|
pretasaṃsthā mṛtāhaśca karmaṇyabhyudaye nṛpa|| 26
अर्थ
युधिष्ठिर! इसी प्रकार स्त्रीके पुंसवन आदि, सन्तानके जातकर्मादि तथा अपने यज्ञ-दीक्षा आदि संस्कारोंके समय, शव-दाहके दिन या वार्षिक श्राद्धके उपलक्ष्यमें अथवा अन्य मांगलिक कर्मोंमें दान आदि शुभकर्म करने चाहिये॥ २६॥