श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.2.54

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

कामं नयतु मां देवः किमर्धेनात्मनो हि मे।

दीनेन जीवता दुःखमनेन विधुरायुषा॥ ५४

kāmaṃ nayatu māṃ devaḥ kimardhenātmano hi me|

dīnena jīvatā duḥkhamanena vidhurāyuṣā|| 54

अर्थ

उसकी मौज हो तो मुझे ले जाय। इसके बिना मैं अपना यह अधूरा विधुर जीवन, जो दीनता और दुःखसे भरा हुआ है, लेकर क्या करूँगा॥ ५४॥✎ 2020

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2020 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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