उसकी मौज हो तो मुझे ले जाय। इसके बिना मैं अपना यह अधूरा विधुर जीवन, जो दीनता और दुःखसे भरा हुआ है, लेकर क्या करूँगा॥ ५४॥✎ 2020
कामं नयतु मां देवः किमर्धेनात्मनो हि मे।
दीनेन जीवता दुःखमनेन विधुरायुषा॥ ५४
उसकी मौज हो तो मुझे ले जाय। इसके बिना मैं अपना यह अधूरा विधुर जीवन, जो दीनता और दुःखसे भरा हुआ है, लेकर क्या करूँगा॥ ५४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.2.54 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 817) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/2/54/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)