श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.9.24

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

तस्मादमूस्तनुभृतामहमाशिषो ज्ञ

आयुः श्रियं विभवमैन्द्रियमाविरिञ्चात्।

नेच्छामि ते विलुलितानुरुविक्रमेण

कालात्मनोपनय मां निजभृत्यपार्श्वम्॥ २४

tasmādamūstanubhṛtāmahamāśiṣo jña

āyuḥ śriyaṃ vibhavamaindriyamāviriñcāt|

necchāmi te vilulitānuruvikrameṇa

kālātmanopanaya māṃ nijabhṛtyapārśvam|| 24

अर्थ

इसलिये मैं ब्रह्मलोकतककी आयु, लक्ष्मी, ऐश्‍वर्य और वे इन्द्रियभोग, जिन्हें संसारके प्राणी चाहा करते हैं, नहीं चाहता; क्योंकि मैं जानता हूँ कि अत्यन्त शक्तिशाली कालका रूप धारण करके आपने उन्हें ग्रस रखा है। इसलिये मुझे आप अपने दासोंकी सन्‍निधिमें ले चलिये॥ २४॥✎ 2002

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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