॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.9.24
तस्मादमूस्तनुभृतामहमाशिषो ज्ञ
आयुः श्रियं विभवमैन्द्रियमाविरिञ्चात्।
नेच्छामि ते विलुलितानुरुविक्रमेण
कालात्मनोपनय मां निजभृत्यपार्श्वम्॥ २४
tasmādamūstanubhṛtāmahamāśiṣo jña
āyuḥ śriyaṃ vibhavamaindriyamāviriñcāt|
necchāmi te vilulitānuruvikrameṇa
kālātmanopanaya māṃ nijabhṛtyapārśvam|| 24
अर्थ
इसलिये मैं ब्रह्मलोकतककी आयु, लक्ष्मी, ऐश्वर्य और वे इन्द्रियभोग, जिन्हें संसारके प्राणी चाहा करते हैं, नहीं चाहता; क्योंकि मैं जानता हूँ कि अत्यन्त शक्तिशाली कालका रूप धारण करके आपने उन्हें ग्रस रखा है। इसलिये मुझे आप अपने दासोंकी सन्निधिमें ले चलिये॥ २४॥✎ 2002