श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.1.23

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तृतीय उत्तमो नाम प्रियव्रतसुतो मनुः।

पवनः सृञ्जयो यज्ञहोत्राद्यास्तत्सुता नृप२॥ २३

tṛtīya uttamo nāma priyavratasuto manuḥ|

pavanaḥ sṛñjayo yajñahotrādyāstatsutā nṛpa|| 23

अर्थ

तीसरे मनु थे उत्तम। वे प्रियव्रतके पुत्र थे। उनके पुत्रोंके नाम थे—पवन, सृंजय, यज्ञहोत्र आदि॥ २३॥✎ 652 653

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—नृपाः।

    (मुद्रित पृष्ठ 908)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #652 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #653 शब्दोंके बीचका स्थान: पुरुषोत्तमभगवान् ने → पुरुषोत्तमभगवान्‌ने

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