श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.1.24

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

वसिष्ठतनयाः सप्त ऋषयः प्रमदादयः।

सत्या वेदश्रुता भद्रा देवा इन्द्रस्तु सत्यजित्॥ २४

vasiṣṭhatanayāḥ sapta ṛṣayaḥ pramadādayaḥ|

satyā vedaśrutā bhadrā devā indrastu satyajit|| 24

अर्थ

उस मन्वन्तरमें वसिष्ठजीके प्रमद आदि सात पुत्र सप्तर्षि थे। सत्य, वेदश्रुत और भद्र नामक देवताओंके प्रधान गण थे और इन्द्रका नाम था सत्यजित्॥ २४॥✎ 652 653

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #652 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #653 शब्दोंके बीचका स्थान: पुरुषोत्तमभगवान् ने → पुरुषोत्तमभगवान्‌ने

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