श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.1.25

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

धर्मस्य सूनृतायां तु भगवान्पुरुषोत्तमः।

सत्यसेन इति ख्यातो जातः सत्यव्रतैः सह॥ २५

dharmasya sūnṛtāyāṃ tu bhagavānpuruṣottamaḥ|

satyasena iti khyāto jātaḥ satyavrataiḥ saha|| 25

अर्थ

उस समय धर्मकी पत्‍नी सूनृताके गर्भसे पुरुषोत्तमभगवान्‌ने सत्यसेनके नामसे अवतार ग्रहण किया था। उनके साथ सत्यव्रत नामके देवगण भी थे॥ २५॥✎ 652 653

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #652 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #653 शब्दोंके बीचका स्थान: पुरुषोत्तमभगवान् ने → पुरुषोत्तमभगवान्‌ने

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