श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.1.29

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

देवा वैधृतयो नाम विधृतेस्तनया नृप।

नष्टाः कालेन यैर्वेदा विधृताः स्वेन तेजसा॥ २९

devā vaidhṛtayo nāma vidhṛtestanayā nṛpa|

naṣṭāḥ kālena yairvedā vidhṛtāḥ svena tejasā|| 29

अर्थ

परीक्षित्! उस तामस नामके मन्वन्तरमें विधृतिके पुत्र वैधृति नामके और भी देवता हुए। उन्होंने समयके फेरसे नष्टप्राय वेदोंको अपनी शक्तिसे बचाया था, इसीलिये ये ‘वैधृति’ कहलाये॥ २९॥✎ 654

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #654 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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