इस मन्वन्तरमें हरिमेधा ऋषिकी पत्नी हरिणीके गर्भसे हरिके रूपमें भगवान्ने अवतार ग्रहण किया। इसी अवतारमें उन्होंने ग्राहसे गजेन्द्रकी रक्षा की थी॥ ३०॥✎ 654
तत्रापि जज्ञे भगवान्हरिण्यां हरिमेधसः।
हरिरित्याहृतो येन गजेन्द्रो मोचितो ग्रहात्॥ ३०
इस मन्वन्तरमें हरिमेधा ऋषिकी पत्नी हरिणीके गर्भसे हरिके रूपमें भगवान्ने अवतार ग्रहण किया। इसी अवतारमें उन्होंने ग्राहसे गजेन्द्रकी रक्षा की थी॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.1.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 908) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/1/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)