॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.1.32
tatkathā sumahat puṇyaṃ dhanyaṃ svastyayanaṃ śubham|
yatra yatrottamaśloko bhagavāngīyate hariḥ|| 32
अर्थ
सब कथाओंमें वही कथा परम पुण्यमय, प्रशंसनीय, मंगलकारी और शुभ है, जिसमें महात्माओंके द्वारा गान किये हुए भगवान् श्रीहरिके पवित्र यशका वर्णन रहता है॥ ३२॥
टिप्पणियाँ
- १
प्रा० पा०—धर्म्यं।
- २
प्रा० पा०—शिवम्।