इसलिये वे बड़े उत्साहसे सिंहनाद करते हुए अपने घोर स्वरवाले शंख बजाने लगे। इन्द्रने देखा कि हमारे शत्रुओंका मन बढ़ रहा है, ये मदोन्मत्त हो रहे हैं; तब उन्हें बड़ा क्रोध आया॥ २४॥✎ 20322033
सिंहनादान्विमुञ्चन्तः शङ्खान्दध्मुर्महारवान्।
दृष्ट्वा सपत्नानुत्सिक्तान्बलभित् कुपितो भृशम्॥ २४
इसलिये वे बड़े उत्साहसे सिंहनाद करते हुए अपने घोर स्वरवाले शंख बजाने लगे। इन्द्रने देखा कि हमारे शत्रुओंका मन बढ़ रहा है, ये मदोन्मत्त हो रहे हैं; तब उन्हें बड़ा क्रोध आया॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.10.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 953) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/10/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)