वे अपने वाहन ऐरावत नामक दिग्गजपर सवार हुए। उसके कपोलोंसे मद बह रहा था। इसलिये इन्द्रकी ऐसी शोभा हुई, मानो भगवान् सूर्य उदयाचलपर आरूढ़ हों और उससे अनेकों झरने बह रहे हों॥ २५॥✎ 20322033
ऐरावतं दिक्करिणमारूढः शुशुभे स्वराट्।
यथा स्रवत्प्रस्रवणमुदयाद्रिमहर्पतिः॥ २५
वे अपने वाहन ऐरावत नामक दिग्गजपर सवार हुए। उसके कपोलोंसे मद बह रहा था। इसलिये इन्द्रकी ऐसी शोभा हुई, मानो भगवान् सूर्य उदयाचलपर आरूढ़ हों और उससे अनेकों झरने बह रहे हों॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.10.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 953) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/10/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)