श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.10.27

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

तेऽन्योन्यमभिसंसृत्य क्षिपन्तो मर्मभिर्मिथः।

आह्वयन्तो विशन्तोऽग्रे युयुधुर्द्वन्द्वयोधिनः॥ २७

te'nyonyamabhisaṃsṛtya kṣipanto marmabhirmithaḥ|

āhvayanto viśanto'gre yuyudhurdvandvayodhinaḥ|| 27

अर्थ

दोनों सेनाएँ आमने-सामने खड़ी हो गयीं। दो-दोकी जोड़ियाँ बनाकर वे लोग लड़ने लगे। कोई आगे बढ़ रहा था, तो कोई नाम ले-लेकर ललकार रहा था। कोई-कोई मर्मभेदी वचनोंके द्वारा अपने प्रतिद्वन्द्वीको धिक्कार रहा था॥ २७॥✎ 2032 2033

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #2032 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि
  • #2033 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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