श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.10.28

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

युयोध बलिरिन्द्रेण तारकेण गुहोऽस्यत।

वरुणो हेतिनायुध्यन्मित्रो राजन्प्रहेतिना॥ २८

yuyodha balirindreṇa tārakeṇa guho'syata|

varuṇo hetināyudhyanmitro rājanprahetinā|| 28

अर्थ

बलि इन्द्रसे, स्वामिकार्तिक तारकासुरसे, वरुण हेतिसे और मित्र प्रहेतिसे भिड़ गये॥ २८॥✎ 1987

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1987 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): महोदवजीकी → महादेवजीकी

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