इधर देवताओंने एक तो अमृत पीकर विशेष शक्ति प्राप्त कर ली थी और दूसरे उन्हें भगवान्के चरणकमलोंका आश्रय था ही। बस, वे भी अपने अस्त्र-शस्त्रोंसे सुसज्जित हो दैत्योंसे भिड़ गये॥ ४॥✎ 723724
ततः सुरगणाः सर्वे सुधया पीतयैधिताः।
प्रतिसंयुयुधुः शस्त्रैर्नारायणपदाश्रयाः॥ ४
इधर देवताओंने एक तो अमृत पीकर विशेष शक्ति प्राप्त कर ली थी और दूसरे उन्हें भगवान्के चरणकमलोंका आश्रय था ही। बस, वे भी अपने अस्त्र-शस्त्रोंसे सुसज्जित हो दैत्योंसे भिड़ गये॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.10.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 951) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/10/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)