श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.10.5

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

तत्र दैवासुरो नाम रणः परमदारुणः।

रोधस्युदन्वतो राजंस्तुमुलो रोमहर्षणः॥ ५

tatra daivāsuro nāma raṇaḥ paramadāruṇaḥ|

rodhasyudanvato rājaṃstumulo romaharṣaṇaḥ|| 5

अर्थ

परीक्षित्! क्षीरसागरके तटपर बड़ा ही रोमांचकारी और अत्यन्त भयंकर संग्राम हुआ। देवता और दैत्योंकी वह घमासान लड़ाई ही ‘देवासुर-संग्राम’ के नामसे कही जाती है॥ ५॥✎ 723 724

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #723 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #724 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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