श्रीशुकदेवजी कहते हैं—जब भगवान् शंकरने विष्णुभगवान्से यह प्रार्थना की, तब वे गम्भीरभावसे हँसकर शंकरजीसे बोले॥ १४॥✎ 732
एवमभ्यर्थितो विष्णुर्भगवान् शूलपाणिना।
प्रहस्य भावगम्भीरं गिरिशं प्रत्यभाषत॥ १४
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—जब भगवान् शंकरने विष्णुभगवान्से यह प्रार्थना की, तब वे गम्भीरभावसे हँसकर शंकरजीसे बोले॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.12.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 965) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/12/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#732 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णुभगवान् से → विष्णुभगवान्से