श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.12.17

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

इति ब्रुवाणो भगवांस्तत्रैवान्तरधीयत।

सर्वतश्चारयंश्‍चक्षुर्भव आस्ते सहोमया॥ १७

iti bruvāṇo bhagavāṃstatraivāntaradhīyata|

sarvataścārayaṃścakṣurbhava āste sahomayā|| 17

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—इस तरह कहते-कहते विष्णुभगवान् वहीं अन्तर्धान हो गये और भगवान् शंकर सती देवीके साथ चारों ओर दृष्टि दौड़ाते हुए वहीं बैठे रहे॥ १७॥✎ 2034

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