श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.12.18

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

ततो ददर्शोपवने वरस्त्रियं

विचित्रपुष्पारुणपल्लवद्रुमे ।

विक्रीडतीं कन्दुकलीलया लसद्

दुकूलपर्यस्तनितम्बमेखलाम् ॥ १८

tato dadarśopavane varastriyaṃ

vicitrapuṣpāruṇapallavadrume |

vikrīḍatīṃ kandukalīlayā lasad

dukūlaparyastanitambamekhalām || 18

अर्थ

इतनेमें ही उन्होंने देखा कि सामने एक बड़ा सुन्दर उपवन है। उसमें भाँति-भाँतिके वृक्ष लग रहे हैं, जो रंग-बिरंगे फूल और लाल-लाल कोंपलोंसे भरे-पूरे हैं। उन्होंने यह भी देखा कि उस उपवनमें एक सुन्दरी स्त्री गेंद उछाल-उछालकर खेल रही है। वह बड़ी ही सुन्दर साड़ी पहने हुए है और उसकी कमरमें करधनीकी लड़ियाँ लटक रही हैं॥ १८॥✎ 2034

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2034 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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