श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.12.31

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तस्यासौ पदवीं रुद्रो विष्णोरद्भुतकर्मणः।

प्रत्यपद्यत कामेन वैरिणेव विनिर्जितः॥ ३१✎ 1116

tasyāsau padavīṃ rudro viṣṇoradbhutakarmaṇaḥ|

pratyapadyata kāmena vairiṇeva vinirjitaḥ|| 31

अर्थ

भगवान् शंकर भी उन मोहिनीवेषधारी अद्भुतकर्मा भगवान् विष्णुके पीछे-पीछे दौड़ने लगे। उस समय ऐसा जान पड़ता था, मानो उनके शत्रु कामदेवने इस समय उनपर विजय प्राप्त कर ली है॥ ३१॥✎ 734 735 736 737 738

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (6)
  • #734 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #735 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #736 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #737 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #738 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #1116 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ३ → ३१

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