॥ श्रीहरिः ॥
अष्टमेऽन्तर आयाते सावर्णिर्भविता मनुः।
नि१र्मोकविरजस्काद्याः सावर्णितनया नृप२॥ ११
aṣṭame'ntara āyāte sāvarṇirbhavitā manuḥ|
nirmokavirajaskādyāḥ sāvarṇitanayā nṛpa|| 11
अर्थ
आठवें मन्वन्तरमें सावर्णि मनु होंगे। उनके पुत्र होंगे निर्मोक, विरजस्क आदि॥ ११॥
अष्टमेऽन्तर आयाते सावर्णिर्भविता मनुः।
निर्मोकविरजस्काद्याः सावर्णितनया नृप॥ ११
आठवें मन्वन्तरमें सावर्णि मनु होंगे। उनके पुत्र होंगे निर्मोक, विरजस्क आदि॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.13.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 970) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/13/11/टिप्पणियाँ
- १
प्रा० पा०—निर्मोह०।
(मुद्रित पृष्ठ 970) - २
प्रा० पा०—नृपाः।
(मुद्रित पृष्ठ 970)