श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.13.16

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

इमे सप्तर्षयस्तत्र३ भविष्यन्ति स्वयोगतः।

इदानीमासते राजन् स्वे स्व आश्रममण्डले॥ १६

ime saptarṣayastatra bhaviṣyanti svayogataḥ|

idānīmāsate rājan sve sva āśramamaṇḍale|| 16

अर्थ

गालव, दीप्तिमान्, परशुराम, अश्‍वत्थामा, कृपाचार्य, ऋष्यशृंग और हमारे पिता भगवान् व्यास—ये आठवें मन्वन्तरमें सप्तर्षि होंगे। इस समय ये लोग योगबलसे अपने-अपने आश्रममण्डलमें स्थित हैं॥ १५-१६॥

यह अर्थ श्लोक 15–16 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—स्तस्मिन्।

    (मुद्रित पृष्ठ 970)

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