देवगुह्यकी पत्नी सरस्वतीके गर्भसे सार्वभौम नामक भगवान्का अवतार होगा। ये ही प्रभु पुरन्दर इन्द्रसे स्वर्गका राज्य छीनकर राजा बलिको दे देंगे॥ १७॥
देवगुह्यात्सरस्वत्यां सार्वभौम इति प्रभुः।
स्थानं पुरन्दराद्धृत्वा बलये दास्यतीश्वरः॥ १७
देवगुह्यकी पत्नी सरस्वतीके गर्भसे सार्वभौम नामक भगवान्का अवतार होगा। ये ही प्रभु पुरन्दर इन्द्रसे स्वर्गका राज्य छीनकर राजा बलिको दे देंगे॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.13.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 971) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/13/17/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1943 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): पुरन्दराद् हृत्वा → पुरन्दराद्धृत्वा