॥ श्रीहरिः ॥
नवमो दक्षसावर्णिर्मनुर्वरुणसम्भवः।
भूतकेतुर्दीप्तकेतुरित्याद्यास्तत्सुता नृप॥ १८
navamo dakṣasāvarṇirmanurvaruṇasambhavaḥ|
bhūtaketurdīptaketurityādyāstatsutā nṛpa|| 18
अर्थ
परीक्षित्! वरुणके पुत्र दक्षसावर्णि नवें मनु होंगे। भूतकेतु, दीप्तकेतु आदि उनके पुत्र होंगे॥ १८॥
नवमो दक्षसावर्णिर्मनुर्वरुणसम्भवः।
भूतकेतुर्दीप्तकेतुरित्याद्यास्तत्सुता नृप॥ १८
परीक्षित्! वरुणके पुत्र दक्षसावर्णि नवें मनु होंगे। भूतकेतु, दीप्तकेतु आदि उनके पुत्र होंगे॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.13.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 971) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/13/18/