श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.13.25

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

विहङ्गमाः कामगमा निर्वाणरुचयः सुराः।

इन्द्रश्‍च वैधृतस्तेषामृषयश्चारुणादयः॥ २५

vihaṅgamāḥ kāmagamā nirvāṇarucayaḥ surāḥ|

indraśca vaidhṛtasteṣāmṛṣayaścāruṇādayaḥ|| 25

अर्थ

विहंगम, कामगम, निर्वाणरुचि आदि देवताओंके गण होंगे। अरुणादि सप्तर्षि होंगे और वैधृत नामके इन्द्र होंगे॥ २५॥

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