श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.13.26

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

आर्यकस्य सुतस्तत्र धर्मसेतुरिति स्मृतः।

वैधृतायां हरेरंशस्त्रिलोकीं धारयिष्यति॥ २६

āryakasya sutastatra dharmaseturiti smṛtaḥ|

vaidhṛtāyāṃ hareraṃśastrilokīṃ dhārayiṣyati|| 26

अर्थ

आर्यककी पत्‍नी वैधृताके गर्भसे धर्मसेतुके रूपमें भगवान्‌का अंशावतार होगा और उसी रूपमें वे त्रिलोकीकी रक्षा करेंगे॥ २६॥

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