श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.13.27

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

भविता रुद्रसावर्णी राजन्द्वादशमो मनुः।

देववानुपदेवश्‍च देवश्रेष्ठादयः सुताः॥ २७

bhavitā rudrasāvarṇī rājandvādaśamo manuḥ|

devavānupadevaśca devaśreṣṭhādayaḥ sutāḥ|| 27

अर्थ

परीक्षित्! बारहवें मनु होंगे रुद्रसावर्णि। उनके देववान्, उपदेव और देवश्रेष्ठ आदि पुत्र होंगे॥ २७॥✎ 1996

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1996 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): ऋतुधामा → ऋतधामा

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