श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.13.6

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

अत्रापि भगवज्जन्म कश्यपाददितेरभूत्।

आदित्यानामवरजो विष्णुर्वामनरूपधृक्॥ ६

atrāpi bhagavajjanma kaśyapādaditerabhūt|

ādityānāmavarajo viṣṇurvāmanarūpadhṛk|| 6

अर्थ

इस मन्वन्तरमें भी कश्यपकी पत्‍नी अदितिके गर्भसे आदित्योंके छोटे भाई वामनके रूपमें भगवान् विष्णुने अवतार ग्रहण किया था॥ ६॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें