श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.13.7

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

संक्षेपतो मयोक्तानि सप्त मन्वन्तराणि ते।

भविष्याण्यथ वक्ष्यामि विष्णोः शक्‍त्यान्वितानि च॥ ७

saṃkṣepato mayoktāni sapta manvantarāṇi te|

bhaviṣyāṇyatha vakṣyāmi viṣṇoḥ śaktyānvitāni ca|| 7

अर्थ

परीक्षित्! इस प्रकार मैंने संक्षेपसे तुम्हें सात मन्वन्तरोंका वर्णन सुनाया; अब भगवान्‌की शक्तिसे युक्त अगले (आनेवाले) सात मन्वन्तरोंका वर्णन करता हूँ॥ ७॥✎ 741

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #741 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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