āśu tuṣyati me devaḥ sīdantyāḥ saha putrakaiḥ|| 23
अर्थ
पतिदेव! मैं अपने पुत्रोंके साथ बहुत ही दुःख भोग रही हूँ। जिससे वे शीघ्र ही मुझपर प्रसन्न हो जायँ, उनकी आराधनाकी वही विधि मुझे बतलाइये॥ २३॥✎ 750
आदिश त्वं द्विजश्रेष्ठ विधिं तदुपधावनम्।
आशु तुष्यति मे देवः सीदन्त्याः सह पुत्रकैः॥ २३
पतिदेव! मैं अपने पुत्रोंके साथ बहुत ही दुःख भोग रही हूँ। जिससे वे शीघ्र ही मुझपर प्रसन्न हो जायँ, उनकी आराधनाकी वही विधि मुझे बतलाइये॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.16.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 980) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/16/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#750 शब्दोंके बीचका स्थान: जगदीश्वरभगवान् की → जगदीश्वरभगवान्की