yathā me satyasaṅkalpo vidadhyāt sa manoratham|| 22
अर्थ
अदितिने पूछा—भगवन्! मैं जगदीश्वरभगवान्की आराधना किस प्रकार करूँ, जिससे वे सत्यसंकल्प प्रभु मेरा मनोरथ पूर्ण करें॥ २२॥✎ 750
केनाहं विधिना ब्रह्मन्नुपस्थास्ये जगत्पतिम्।
यथा मे सत्यसङ्कल्पो विदध्यात् स मनोरथम्॥ २२
अदितिने पूछा—भगवन्! मैं जगदीश्वरभगवान्की आराधना किस प्रकार करूँ, जिससे वे सत्यसंकल्प प्रभु मेरा मनोरथ पूर्ण करें॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.16.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 980) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/16/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#750 शब्दोंके बीचका स्थान: जगदीश्वरभगवान् की → जगदीश्वरभगवान्की