श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब अदितिने इस प्रकार कमलनयनभगवान्की स्तुति की, तब समस्त प्राणियोंके हृदयमें रहकर उनकी गति-विधि जाननेवाले भगवान्ने यह बात कही॥ ११॥✎ 7737741368
अदित्यैवं स्तुतो राजन्भगवान्पुष्करेक्षणः।
क्षेत्रज्ञः सर्वभूतानामिति होवाच भारत॥ ११
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब अदितिने इस प्रकार कमलनयनभगवान्की स्तुति की, तब समस्त प्राणियोंके हृदयमें रहकर उनकी गति-विधि जाननेवाले भगवान्ने यह बात कही॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.17.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 986) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/17/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)