श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.17.13

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

तान्विनिर्जित्य समरे दुर्मदानसुरर्षभान्।

प्रतिलब्धजयश्रीभिः पुत्रैरिच्छस्युपासितुम्॥ १३

tānvinirjitya samare durmadānasurarṣabhān|

pratilabdhajayaśrībhiḥ putrairicchasyupāsitum|| 13

अर्थ

तुम चाहती हो कि युद्धमें तुम्हारे पुत्र उन मतवाले और बली असुरोंको जीतकर विजयलक्ष्मी प्राप्त करें, तब तुम उनके साथ भगवान्‌की उपासना करो॥ १३॥✎ 775 776

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #775 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #776 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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