तुम चाहती हो कि युद्धमें तुम्हारे पुत्र उन मतवाले और बली असुरोंको जीतकर विजयलक्ष्मी प्राप्त करें, तब तुम उनके साथ भगवान्की उपासना करो॥ १३॥✎ 775776
तान्विनिर्जित्य समरे दुर्मदानसुरर्षभान्।
प्रतिलब्धजयश्रीभिः पुत्रैरिच्छस्युपासितुम्॥ १३
तुम चाहती हो कि युद्धमें तुम्हारे पुत्र उन मतवाले और बली असुरोंको जीतकर विजयलक्ष्मी प्राप्त करें, तब तुम उनके साथ भगवान्की उपासना करो॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.17.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 986) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/17/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)