श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.17.18

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

त्वयार्चितश्चाहमपत्यगुप्तये

पयोव्रतेनानुगुणं समीडितः।

स्वांशेन पुत्रत्वमुपेत्य ते सुतान्

गोप्तास्मि मारीचतपस्यधिष्ठितः॥ १८

tvayārcitaścāhamapatyaguptaye

payovratenānuguṇaṃ samīḍitaḥ|

svāṃśena putratvamupetya te sutān

goptāsmi mārīcatapasyadhiṣṭhitaḥ|| 18

अर्थ

तुमने अपने पुत्रोंकी रक्षाके लिये ही विधिपूर्वक पयोव्रतसे मेरी पूजा एवं स्तुति की है। अतः मैं अंशरूपसे कश्यपके वीर्यमें प्रवेश करूँगा और तुम्हारा पुत्र बनकर तुम्हारी सन्तानकी रक्षा करूँगा॥ १८॥✎ 1624

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1624 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: विधि-पूर्वक → विधिपूर्वक

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