श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.17.19

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

उपधाव पतिं भद्रे प्रजापतिमकल्मषम्।

मां च भावयती पत्यावेवंरूपमवस्थितम्॥ १९

upadhāva patiṃ bhadre prajāpatimakalmaṣam|

māṃ ca bhāvayatī patyāvevaṃrūpamavasthitam|| 19

अर्थ

कल्याणी! तुम अपने पति कश्यपमें मुझे इसी रूपमें स्थित देखो और उन निष्पाप प्रजापतिकी सेवा करो॥ १९॥✎ 1951

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1951 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): स्थति → स्थित

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