॥ श्रीहरिः ॥
मनश्चैकाग्रया बुद्ध्या भगवत्यखिलात्मनि।
वासुदेवे समाधाय चचार ह पयोव्रतम्॥ ३
manaścaikāgrayā buddhyā bhagavatyakhilātmani|
vāsudeve samādhāya cacāra ha payovratam|| 3
अर्थ
उसने एकाग्र बुद्धिसे अपने मनको सर्वात्मा भगवान् वासुदेवमें पूर्णरूपसे लगाकर पयोव्रतका अनुष्ठान किया॥ ३॥✎ 769 770 771 772
मनश्चैकाग्रया बुद्ध्या भगवत्यखिलात्मनि।
वासुदेवे समाधाय चचार ह पयोव्रतम्॥ ३
उसने एकाग्र बुद्धिसे अपने मनको सर्वात्मा भगवान् वासुदेवमें पूर्णरूपसे लगाकर पयोव्रतका अनुष्ठान किया॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.17.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 985) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/17/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)
- #769 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्की
- #770 शब्दोंके बीचका स्थान: यज्ञेश्वर-भगवान् को → यज्ञेश्वर-भगवान्को
- #771 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्की
- #772 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्को